Correct Answer:
Option C - इस इंजन में चार स्ट्रोक की बजाय दो स्ट्रोक होते है। जिन्हें क्रमश: अपवार्ड स्ट्रोक (Upward stroke) तथा डाउनवार्ड स्ट्रोक (Downward stroke) कहते है। इन्हीं दो स्ट्रोक में सक्शन, कम्प्रैशन, पॉवर, एक्झॉस्ट, ऑपरेशन्स हो जाते हैं। इंजन में वाल्व की बजाय इनलैट पोर्ट तथा एक्झॉस्ट पोर्ट (Port) व टांर्सफर पोर्ट होते हैं जो पिस्टन के चलने से ही खुलते और बंद होेते हैं। टू-स्ट्रोक साइकिल इंजन के ऑपरेशन्स का एक साइकिल पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूरा होता है और पिस्टन के दो स्ट्रोक में क्रैंक शॉफ्ट का एक रिवोल्यूशन होता है। प्रत्येक रिवोल्यूशन में क्रैंक शॉफ्ट को एक बार पॉवर मिलती है।
C. इस इंजन में चार स्ट्रोक की बजाय दो स्ट्रोक होते है। जिन्हें क्रमश: अपवार्ड स्ट्रोक (Upward stroke) तथा डाउनवार्ड स्ट्रोक (Downward stroke) कहते है। इन्हीं दो स्ट्रोक में सक्शन, कम्प्रैशन, पॉवर, एक्झॉस्ट, ऑपरेशन्स हो जाते हैं। इंजन में वाल्व की बजाय इनलैट पोर्ट तथा एक्झॉस्ट पोर्ट (Port) व टांर्सफर पोर्ट होते हैं जो पिस्टन के चलने से ही खुलते और बंद होेते हैं। टू-स्ट्रोक साइकिल इंजन के ऑपरेशन्स का एक साइकिल पिस्टन के दो स्ट्रोक में पूरा होता है और पिस्टन के दो स्ट्रोक में क्रैंक शॉफ्ट का एक रिवोल्यूशन होता है। प्रत्येक रिवोल्यूशन में क्रैंक शॉफ्ट को एक बार पॉवर मिलती है।