Explanations:
अलाउद्दीन वह सुल्तान था जो अधिराजत्व में विश्वास करता था, न कि प्रभुसत्ता पर। अलाउद्दीन भी बलबन के समान राजत्व के सिद्धान्त में विश्वास रखने वाला व्यक्ति था। अलाउद्दीन भी राजा के दैवीय अधिकारों में विश्वास रखता था। अलाउद्दीन के ही शब्दों में ‘‘मैं नहीं जानता कि कानून की दृष्टि में क्या उचित है और क्या अनुचित। मैं राज्य की भलाई अथवा अवसर विशेष के लिए जो उपयुक्त समझता हूँ उसी को करने की आज्ञा देता हूँ, अन्तिम न्याय के दिन मेरा क्या होगा मैं नहीं जानता’’।