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Q: The strength at which steel fails under repeated applications of load is known as:/वह सामर्थ्य जिस पर बार-बार लोड लगाने पर इस्पात विफल हो जाता है, कहलाती है :
  • A. Impact strength/संघट्ट सामर्थ्य
  • B. Tensile strength/तनन सामर्थ्य
  • C. Yield strength/पराभव सामर्थ्य
  • D. Fatigue strength/फटीग सामर्थ्य
Correct Answer: Option D - IS : 800-2007 क्लॉज 1.3.48 के अनुसार- फटीग सामर्थ्य (Fatigue strength)– एक निरंतर चक्रीय भार (Cyclic loading) के कारण संरचना में विरुपण उत्पन्न होता है, क्योंकि प्रत्येक चक्रीय भार के कारण एक निश्चित विकृति ऊर्जा संचित होती है। तीव्र लोडिंग दर के कारण ऊर्जा मुक्त नहीं हो पाती है तथा एक चरम बिन्दु के बाद संरचना में एक विफलता उत्पन्न हो जाता है, जिसे फटीग सामर्थ्य कहते हैं।
D. IS : 800-2007 क्लॉज 1.3.48 के अनुसार- फटीग सामर्थ्य (Fatigue strength)– एक निरंतर चक्रीय भार (Cyclic loading) के कारण संरचना में विरुपण उत्पन्न होता है, क्योंकि प्रत्येक चक्रीय भार के कारण एक निश्चित विकृति ऊर्जा संचित होती है। तीव्र लोडिंग दर के कारण ऊर्जा मुक्त नहीं हो पाती है तथा एक चरम बिन्दु के बाद संरचना में एक विफलता उत्पन्न हो जाता है, जिसे फटीग सामर्थ्य कहते हैं।

Explanations:

IS : 800-2007 क्लॉज 1.3.48 के अनुसार- फटीग सामर्थ्य (Fatigue strength)– एक निरंतर चक्रीय भार (Cyclic loading) के कारण संरचना में विरुपण उत्पन्न होता है, क्योंकि प्रत्येक चक्रीय भार के कारण एक निश्चित विकृति ऊर्जा संचित होती है। तीव्र लोडिंग दर के कारण ऊर्जा मुक्त नहीं हो पाती है तथा एक चरम बिन्दु के बाद संरचना में एक विफलता उत्पन्न हो जाता है, जिसे फटीग सामर्थ्य कहते हैं।