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Q: The statement, "The State is an ethical institution which is indispensable for the full moral development of man" is attributed to ‘‘राज्य एक नैतिक संस्था है जो मनुष्य के पूर्ण नैतिक विकास के लिए अपरिहार्य है’’। इस वक्तव्य का सम्बन्ध है–
  • A. Individualists / व्यक्तिवादियों से
  • B. Idealists / आदर्शवादियों से
  • C. Anarchists / अराजकतावादियों से
  • D. Marxists / मार्क्स वादियों से
Correct Answer: Option B - ‘‘राज्य एक नैतिक संस्था है जो मनुष्य के पूर्ण नैतिक विकास के लिए अपरिहार्य है’’ यह वक्तव्य आदर्शवादियों से सम्बंधित है। आदर्शवादियों के अनुसार, मनुष्य सदाचार सम्बंधी आदर्शों का पालन करके ही अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और राज्य ऐसी बाह्य परिस्थितियाँ प्रदान करता है जिसके अंतर्गत रहकर ही सदाचार सम्बंधी नियमों का पालन किया जा सकता है। आदर्शवादी सिद्धान्त का प्रतिपादन मुख्य रूप से काण्ट, हीगल, ग्रीन, ब्रैडले, बोंसाके आदि विचारकों द्वारा किया गया है। आदर्शवाद कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे- कल्पनावाद, रहस्यवाद, तत्ववाद, निरंकुशतावाद आदि।
B. ‘‘राज्य एक नैतिक संस्था है जो मनुष्य के पूर्ण नैतिक विकास के लिए अपरिहार्य है’’ यह वक्तव्य आदर्शवादियों से सम्बंधित है। आदर्शवादियों के अनुसार, मनुष्य सदाचार सम्बंधी आदर्शों का पालन करके ही अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और राज्य ऐसी बाह्य परिस्थितियाँ प्रदान करता है जिसके अंतर्गत रहकर ही सदाचार सम्बंधी नियमों का पालन किया जा सकता है। आदर्शवादी सिद्धान्त का प्रतिपादन मुख्य रूप से काण्ट, हीगल, ग्रीन, ब्रैडले, बोंसाके आदि विचारकों द्वारा किया गया है। आदर्शवाद कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे- कल्पनावाद, रहस्यवाद, तत्ववाद, निरंकुशतावाद आदि।

Explanations:

‘‘राज्य एक नैतिक संस्था है जो मनुष्य के पूर्ण नैतिक विकास के लिए अपरिहार्य है’’ यह वक्तव्य आदर्शवादियों से सम्बंधित है। आदर्शवादियों के अनुसार, मनुष्य सदाचार सम्बंधी आदर्शों का पालन करके ही अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकता है और राज्य ऐसी बाह्य परिस्थितियाँ प्रदान करता है जिसके अंतर्गत रहकर ही सदाचार सम्बंधी नियमों का पालन किया जा सकता है। आदर्शवादी सिद्धान्त का प्रतिपादन मुख्य रूप से काण्ट, हीगल, ग्रीन, ब्रैडले, बोंसाके आदि विचारकों द्वारा किया गया है। आदर्शवाद कई अन्य नामों से भी जाना जाता है, जैसे- कल्पनावाद, रहस्यवाद, तत्ववाद, निरंकुशतावाद आदि।