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Q: The sign of decay appearing in the form of yellow or red tinge or discolouration of over mature trees is known as- बहुत पुराने (अपरिपरिपक्व) वृक्षों पर पीले या लाल रंग या विवर्णता के रूप में दिखाने वाले क्षय के संकेत को क्या कहते हैं?
  • A. foxiness/फॉक्सीनेस
  • B. shakes/विपाट
  • C. knots/गाँठे
  • D. braces/ब्रेसिज
Correct Answer: Option A - लाल रंग में या पीले रंग के रूप में दिखने वाले या मलिनकिरण या रंग उड़ना या अधिक परिपक्व पेड़ों के कारण उत्पनन दोष को फाक्सीनैस (Foxiness) कहते है। यह दोष लकड़ी में जब लम्बे समय तक स्टोर की हुई लकड़ी का उचित वातन नहीं होता है तब यह दोष प्रकट होने लगता है। किन्तु जीवित वृक्ष में जब इसके किसी भाग में किसी अवरोध के कारण रस (Sap) पहुँचना बन्द हो जाता है तो वृक्ष की उस भाग की काष्ठ पीली पड़ने लगती है। तब इस दोष को फाक्सीनैस कहते है। गाँठे- वृक्ष के तने जहाँ से शाखायें निकलती है, वहाँ पर दोनों के वार्षिक वलय एक दूसरे से भिन्न दिशा में होते हैं जिसके कारण उस जगह की लकड़ी कठोर व काली पड़ जाती है इसे गाँठ कहते है।
A. लाल रंग में या पीले रंग के रूप में दिखने वाले या मलिनकिरण या रंग उड़ना या अधिक परिपक्व पेड़ों के कारण उत्पनन दोष को फाक्सीनैस (Foxiness) कहते है। यह दोष लकड़ी में जब लम्बे समय तक स्टोर की हुई लकड़ी का उचित वातन नहीं होता है तब यह दोष प्रकट होने लगता है। किन्तु जीवित वृक्ष में जब इसके किसी भाग में किसी अवरोध के कारण रस (Sap) पहुँचना बन्द हो जाता है तो वृक्ष की उस भाग की काष्ठ पीली पड़ने लगती है। तब इस दोष को फाक्सीनैस कहते है। गाँठे- वृक्ष के तने जहाँ से शाखायें निकलती है, वहाँ पर दोनों के वार्षिक वलय एक दूसरे से भिन्न दिशा में होते हैं जिसके कारण उस जगह की लकड़ी कठोर व काली पड़ जाती है इसे गाँठ कहते है।

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लाल रंग में या पीले रंग के रूप में दिखने वाले या मलिनकिरण या रंग उड़ना या अधिक परिपक्व पेड़ों के कारण उत्पनन दोष को फाक्सीनैस (Foxiness) कहते है। यह दोष लकड़ी में जब लम्बे समय तक स्टोर की हुई लकड़ी का उचित वातन नहीं होता है तब यह दोष प्रकट होने लगता है। किन्तु जीवित वृक्ष में जब इसके किसी भाग में किसी अवरोध के कारण रस (Sap) पहुँचना बन्द हो जाता है तो वृक्ष की उस भाग की काष्ठ पीली पड़ने लगती है। तब इस दोष को फाक्सीनैस कहते है। गाँठे- वृक्ष के तने जहाँ से शाखायें निकलती है, वहाँ पर दोनों के वार्षिक वलय एक दूसरे से भिन्न दिशा में होते हैं जिसके कारण उस जगह की लकड़ी कठोर व काली पड़ जाती है इसे गाँठ कहते है।