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Q: The Revolutions of 1848 in Europe were primarily driven by demands for:/यूरोप में 1848 की क्रांतियाँ मुख्यत; निम्न मांगों से प्रेरित थीं
  • A. Economic equality and socialism आर्थिक समानता और समाजवाद
  • B. Religious freedom and tolerance धार्मिक स्वतंत्रता और सहिष्णुता
  • C. Political reforms and democracy राजनीतिक सुधार और लोकतंत्र
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above/उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option C - यूरोप में 1848 की क्रांतियाँ मुख्यत: आर्थिक समानता, समाजवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता, राजनीतिक सुधार और लोकतंत्र से प्रेरित था। 1848 में जब अनेक यूरोपीय देशों में गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से पीrडि़त किसान-मजदूर विद्रोह कर रहे थे तब उसके समानांतर पढ़े-लिखे मध्यवर्गों की एक क्रांति हो रही थी, जिसे 1848 की उदारवादी क्रांति कहा जाता है। फरवरी 1848 की क्रांति के कारण फ्रांस के राजा को गद्दी छोड़नी पड़ी तथा एक गणतंत्र की घोषणा की गई जो सभी पुरुषों के सार्विक मताधिकार पर आधारित था। यूरोप के अन्य भागों में जहाँ अभी तक स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य अस्तिव में नहीं आए थे– जैसे जर्मनी, इटली, पोलैण्ड, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य आदि। इन देशों के उदारवादी मध्यवर्गों के स्त्री-पुरुषों ने संविधानवाद की मांग को राष्ट्रीय एकीकरण की मांग से जोड़ दिया।
C. यूरोप में 1848 की क्रांतियाँ मुख्यत: आर्थिक समानता, समाजवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता, राजनीतिक सुधार और लोकतंत्र से प्रेरित था। 1848 में जब अनेक यूरोपीय देशों में गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से पीrडि़त किसान-मजदूर विद्रोह कर रहे थे तब उसके समानांतर पढ़े-लिखे मध्यवर्गों की एक क्रांति हो रही थी, जिसे 1848 की उदारवादी क्रांति कहा जाता है। फरवरी 1848 की क्रांति के कारण फ्रांस के राजा को गद्दी छोड़नी पड़ी तथा एक गणतंत्र की घोषणा की गई जो सभी पुरुषों के सार्विक मताधिकार पर आधारित था। यूरोप के अन्य भागों में जहाँ अभी तक स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य अस्तिव में नहीं आए थे– जैसे जर्मनी, इटली, पोलैण्ड, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य आदि। इन देशों के उदारवादी मध्यवर्गों के स्त्री-पुरुषों ने संविधानवाद की मांग को राष्ट्रीय एकीकरण की मांग से जोड़ दिया।

Explanations:

यूरोप में 1848 की क्रांतियाँ मुख्यत: आर्थिक समानता, समाजवाद, धार्मिक स्वतंत्रता, सहिष्णुता, राजनीतिक सुधार और लोकतंत्र से प्रेरित था। 1848 में जब अनेक यूरोपीय देशों में गरीबी, बेरोजगारी और भुखमरी से पीrडि़त किसान-मजदूर विद्रोह कर रहे थे तब उसके समानांतर पढ़े-लिखे मध्यवर्गों की एक क्रांति हो रही थी, जिसे 1848 की उदारवादी क्रांति कहा जाता है। फरवरी 1848 की क्रांति के कारण फ्रांस के राजा को गद्दी छोड़नी पड़ी तथा एक गणतंत्र की घोषणा की गई जो सभी पुरुषों के सार्विक मताधिकार पर आधारित था। यूरोप के अन्य भागों में जहाँ अभी तक स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य अस्तिव में नहीं आए थे– जैसे जर्मनी, इटली, पोलैण्ड, ऑस्ट्रो-हंगेरियन साम्राज्य आदि। इन देशों के उदारवादी मध्यवर्गों के स्त्री-पुरुषों ने संविधानवाद की मांग को राष्ट्रीय एकीकरण की मांग से जोड़ दिया।