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Q: The reason for decline of the handicraft industries in India under the British rule was ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के पतन का कारण था
  • A. Competition with machine made goods मशीन-निर्मित वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा
  • B. Exploitative policies of the British Government in India भारत में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ
  • C. Excessive taxes on Indian goods भारतीय वस्तुओं पर अत्यधिक कर
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. None of the above /उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option D - ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के पतन का कारण मशीन-निर्मित वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा भारत में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ एवं भारतीय वस्तुओं पर अत्यधिक कर था। रेलवे के विकास ने ग्रामीण क्षेत्रों मे भी इंग्लैण्ड की वस्तुओं को पहुँचाना शुरू किया। हस्तशिल्प की वस्तुओं की कीमतें बढ़ गयीं और मशीन-निर्मित चीजें बाजार में सस्ती मिलने लगीं। अंग्रेजी शासन ने भारतीय कुटीर उद्योग एवं हस्तशिल्प के विनाश ने व्यापार सन्तुलन को नष्ट कर दिया। शिल्प एवं उद्योग में लगे हुए कारीगर शहर छोड़कर गाँवों में लौट गये और खेती करने को बाध्य हो गये।
D. ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के पतन का कारण मशीन-निर्मित वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा भारत में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ एवं भारतीय वस्तुओं पर अत्यधिक कर था। रेलवे के विकास ने ग्रामीण क्षेत्रों मे भी इंग्लैण्ड की वस्तुओं को पहुँचाना शुरू किया। हस्तशिल्प की वस्तुओं की कीमतें बढ़ गयीं और मशीन-निर्मित चीजें बाजार में सस्ती मिलने लगीं। अंग्रेजी शासन ने भारतीय कुटीर उद्योग एवं हस्तशिल्प के विनाश ने व्यापार सन्तुलन को नष्ट कर दिया। शिल्प एवं उद्योग में लगे हुए कारीगर शहर छोड़कर गाँवों में लौट गये और खेती करने को बाध्य हो गये।

Explanations:

ब्रिटिश काल में भारतीय हस्तशिल्प उद्योग के पतन का कारण मशीन-निर्मित वस्तुओं से प्रतिस्पर्धा भारत में ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियाँ एवं भारतीय वस्तुओं पर अत्यधिक कर था। रेलवे के विकास ने ग्रामीण क्षेत्रों मे भी इंग्लैण्ड की वस्तुओं को पहुँचाना शुरू किया। हस्तशिल्प की वस्तुओं की कीमतें बढ़ गयीं और मशीन-निर्मित चीजें बाजार में सस्ती मिलने लगीं। अंग्रेजी शासन ने भारतीय कुटीर उद्योग एवं हस्तशिल्प के विनाश ने व्यापार सन्तुलन को नष्ट कर दिया। शिल्प एवं उद्योग में लगे हुए कारीगर शहर छोड़कर गाँवों में लौट गये और खेती करने को बाध्य हो गये।