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Q: The property of the material or a structure indicating the extent to which it can deform beyond the limit of yield deformation before failure or fracture is termed as: पदार्थ या संरचना का गुण यह दर्शाता है कि विफलता या फैक्चर से पहले पराभव विरुपण की सीमा से आगे किस स्थिति तक विकृत हो सकती है, इसे कहा जाता है-
  • A. failure load/विफलता भार
  • B. ductility/तन्यता
  • C. yielding/यील्डिंग
  • D. malleability/आघातवर्धनीयता
Correct Answer: Option B - किसी पदार्थ या संरचना का वह गुण जिसके कारण पदार्थ विफलता या फैक्चर से पहले पराभव विरुपण की सीमा से आगे तक विकृत हो सकती है, तन्यता (ductility) कहलाती है तन्य पदार्थ को खींचकर महीन तार के रूप में बनया जा सकता है। तन्य पदार्थ में प्रत्यास्थता, तनाव का मान 5% से अधिक होता है। आघातवर्धनीयता पदार्थ (Malleability material) - वे पदार्थ जिसको हथौड़े आदि से पीटकर पतली परतें (शीटें) बनायी जाती है आघातवर्धनीय पदार्थ कहलाते है सोना, पिटवा लोहा इत्यादि पदार्थ आघातवर्धनीय पदार्थ है पीटने पर दरारे या फटान नहीं पड़ता है बल्कि लम्बाई की दिशा में फैल जाते है इसमें सुघट्यता का उच्च गुण पाया जाता है।
B. किसी पदार्थ या संरचना का वह गुण जिसके कारण पदार्थ विफलता या फैक्चर से पहले पराभव विरुपण की सीमा से आगे तक विकृत हो सकती है, तन्यता (ductility) कहलाती है तन्य पदार्थ को खींचकर महीन तार के रूप में बनया जा सकता है। तन्य पदार्थ में प्रत्यास्थता, तनाव का मान 5% से अधिक होता है। आघातवर्धनीयता पदार्थ (Malleability material) - वे पदार्थ जिसको हथौड़े आदि से पीटकर पतली परतें (शीटें) बनायी जाती है आघातवर्धनीय पदार्थ कहलाते है सोना, पिटवा लोहा इत्यादि पदार्थ आघातवर्धनीय पदार्थ है पीटने पर दरारे या फटान नहीं पड़ता है बल्कि लम्बाई की दिशा में फैल जाते है इसमें सुघट्यता का उच्च गुण पाया जाता है।

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किसी पदार्थ या संरचना का वह गुण जिसके कारण पदार्थ विफलता या फैक्चर से पहले पराभव विरुपण की सीमा से आगे तक विकृत हो सकती है, तन्यता (ductility) कहलाती है तन्य पदार्थ को खींचकर महीन तार के रूप में बनया जा सकता है। तन्य पदार्थ में प्रत्यास्थता, तनाव का मान 5% से अधिक होता है। आघातवर्धनीयता पदार्थ (Malleability material) - वे पदार्थ जिसको हथौड़े आदि से पीटकर पतली परतें (शीटें) बनायी जाती है आघातवर्धनीय पदार्थ कहलाते है सोना, पिटवा लोहा इत्यादि पदार्थ आघातवर्धनीय पदार्थ है पीटने पर दरारे या फटान नहीं पड़ता है बल्कि लम्बाई की दिशा में फैल जाते है इसमें सुघट्यता का उच्च गुण पाया जाता है।