Correct Answer:
Option B - नाबार्ड द्वारा वर्ष 1992 में ग्रामीण-गरीब के स्वयं सहायता समूह (सेल्फहेल्प ग्रुप) को बैंकों से जोड़ने की योजना को प्रायोगिक परियोजना के रूप में आरम्भ किया गया था। स्वयं सहायता समूह समाज के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा प्रदान करते हैं।
B. नाबार्ड द्वारा वर्ष 1992 में ग्रामीण-गरीब के स्वयं सहायता समूह (सेल्फहेल्प ग्रुप) को बैंकों से जोड़ने की योजना को प्रायोगिक परियोजना के रूप में आरम्भ किया गया था। स्वयं सहायता समूह समाज के गरीबों और हाशिए पर रहने वाले वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं व वित्तीय समावेशन को बढ़ावा प्रदान करते हैं।