Correct Answer:
Option D - स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत बंगाल विभाजन के परिणामस्वरूप (1905 ई.) हुई, जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया। गरम दल (उग्रवाद) के समर्थक अरविन्द घोष, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल तथा लाला लाजपत राय आदि ने स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में लागू करना चाहते थे, जबकि नरमपंथ के समर्थक स्वदेशी आंदोलन को सिर्फ बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे। मतभेद बढ़ता रहा तथा 1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस `नरमदल' एवं `गरमदल' में विभाजित हो गई। बीसवीं सदी के प्रारम्भिक वर्षों में काँग्रेस में विभाजन की प्रक्रिया शुरू हुई– काँग्रेस आन्दोलन की रणनीतियों पर, काँग्रेस आन्दोलन के उद्देश्यों पर तथा काँग्रेस आंदोलन में लोगों की भागीदारी पर थी।
D. स्वदेशी आंदोलन की शुरुआत बंगाल विभाजन के परिणामस्वरूप (1905 ई.) हुई, जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं का बहिष्कार किया गया और स्वदेशी उत्पादन को प्रोत्साहन दिया गया। गरम दल (उग्रवाद) के समर्थक अरविन्द घोष, लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक, विपिन चंद्र पाल तथा लाला लाजपत राय आदि ने स्वदेशी आंदोलन को पूरे देश में लागू करना चाहते थे, जबकि नरमपंथ के समर्थक स्वदेशी आंदोलन को सिर्फ बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे। मतभेद बढ़ता रहा तथा 1907 के कांग्रेस के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस `नरमदल' एवं `गरमदल' में विभाजित हो गई। बीसवीं सदी के प्रारम्भिक वर्षों में काँग्रेस में विभाजन की प्रक्रिया शुरू हुई– काँग्रेस आन्दोलन की रणनीतियों पर, काँग्रेस आन्दोलन के उद्देश्यों पर तथा काँग्रेस आंदोलन में लोगों की भागीदारी पर थी।