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Q: The Prismatic Compass is used for measuring which of the following?/प्रि़ज्मीय दिक्सूचक को निम्नलिखित में से किस मापन के लिए उपयोग किया जाता है?
  • A. Magnetic bearings/चुम्बकीय दिक्मान
  • B. Distance/दूरी
  • C. Horizontal angles/क्षैतिज कोण
  • D. Altitude/उच्चता
Correct Answer: Option A - चुम्बकीय दिक्मान (Magnetic Bearing)- चुम्बकीय याम्योत्तर तथा किसी सर्वे रेखा के मध्य बनने वाले क्षैतिज कोण को उस रेखा का चुम्बकीय दिक्मान अथवा दिक्मान कहते है। समतल सर्वेक्षण (Plane Survey) में चुम्बकीय दिक्मान लिये जाते है। दिक्सूचक सदा चुम्बकीय दिक्मान ही दर्शाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर के बदलने पर, इसके संदर्भ से प्रेक्षित चुम्बकीय दिक्सूचक भी बदल जाता है, जिसका परिशुद्ध सर्वेक्षण कार्यो में उचित ध्यान रखा जाता है। प्रिज्मीय दिक्सूचक- इस दिक्सूचक में दिक्मान पूर्णवृत्त दिक्मान पद्धति (W.C.B) में पढ़ा जाता है। इसमें रेखाओं का दिक्मान चुम्बकीय उत्तर के सन्दर्भ में दक्षिणावर्त दिशा में मापा जाता है। ∎ W.C.B में दिक्मान का मान 0-3600 के बीच होता है। ∎ प्रिज्मी दिक्सूचक का अल्पतमांक 30' होता है, जबकि सर्वेक्षक कंपास का अल्पतमांक 15' होता है।
A. चुम्बकीय दिक्मान (Magnetic Bearing)- चुम्बकीय याम्योत्तर तथा किसी सर्वे रेखा के मध्य बनने वाले क्षैतिज कोण को उस रेखा का चुम्बकीय दिक्मान अथवा दिक्मान कहते है। समतल सर्वेक्षण (Plane Survey) में चुम्बकीय दिक्मान लिये जाते है। दिक्सूचक सदा चुम्बकीय दिक्मान ही दर्शाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर के बदलने पर, इसके संदर्भ से प्रेक्षित चुम्बकीय दिक्सूचक भी बदल जाता है, जिसका परिशुद्ध सर्वेक्षण कार्यो में उचित ध्यान रखा जाता है। प्रिज्मीय दिक्सूचक- इस दिक्सूचक में दिक्मान पूर्णवृत्त दिक्मान पद्धति (W.C.B) में पढ़ा जाता है। इसमें रेखाओं का दिक्मान चुम्बकीय उत्तर के सन्दर्भ में दक्षिणावर्त दिशा में मापा जाता है। ∎ W.C.B में दिक्मान का मान 0-3600 के बीच होता है। ∎ प्रिज्मी दिक्सूचक का अल्पतमांक 30' होता है, जबकि सर्वेक्षक कंपास का अल्पतमांक 15' होता है।

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चुम्बकीय दिक्मान (Magnetic Bearing)- चुम्बकीय याम्योत्तर तथा किसी सर्वे रेखा के मध्य बनने वाले क्षैतिज कोण को उस रेखा का चुम्बकीय दिक्मान अथवा दिक्मान कहते है। समतल सर्वेक्षण (Plane Survey) में चुम्बकीय दिक्मान लिये जाते है। दिक्सूचक सदा चुम्बकीय दिक्मान ही दर्शाता है। चुम्बकीय याम्योत्तर के बदलने पर, इसके संदर्भ से प्रेक्षित चुम्बकीय दिक्सूचक भी बदल जाता है, जिसका परिशुद्ध सर्वेक्षण कार्यो में उचित ध्यान रखा जाता है। प्रिज्मीय दिक्सूचक- इस दिक्सूचक में दिक्मान पूर्णवृत्त दिक्मान पद्धति (W.C.B) में पढ़ा जाता है। इसमें रेखाओं का दिक्मान चुम्बकीय उत्तर के सन्दर्भ में दक्षिणावर्त दिशा में मापा जाता है। ∎ W.C.B में दिक्मान का मान 0-3600 के बीच होता है। ∎ प्रिज्मी दिक्सूचक का अल्पतमांक 30' होता है, जबकि सर्वेक्षक कंपास का अल्पतमांक 15' होता है।