What is a sunk cost in the context of decision-marking?/निर्णय लेने के सदंर्भ में डूबी हुई लागत क्या है–
Select the most appropriate synonym of the given word. CONGENIAL
In Which chapter of the right of chidren to free and compulsary Education Act, 2009 we talk about the responsibility of schools and teachers? नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के किस अध्याय में हम विद्यालयों और शिक्षकों के उत्तरदायित्व के बारे में बात करते हैं?
"Ranging Rod not of standard length" can be classified under principal source of error in leveling measurement as ............/ आरेखण रॉड मानक लंबाई की नहीं है, को तलेक्षण माप में त्रुटि के स्रोत के अंतर्गत वर्गीकृत किया जा सकता है।
कोई व्यक्ति `10 में 11 सेब खरीदकर `11 में 10 सेब बेचता है। उसे कितने प्रतिशत लाभ होता है?
एक युटिलिटी सॉफ्टवेयर प्रोग्राम जो मेमोरी के अनावश्यक फ्रैग्मेंट्स को पहचानता है और डिस्क स्पेश को पुनर्व्यवस्थित करता है ताकि आपरेशन इष्टतम ढंग से हो सके, कहलाता है-
मैं 5 अंकों की एक संख्या हूँ, जिसके सभी अंक अलग-अलग हैं। मैं 2 से विभाज्य हूँ, परन्तु 4 से नहीं। मेरे दहाई के स्थान का अंक सबसे छोटी अभाज्य संख्या है। सैकड़े तथा हजार के स्थानों के अंक क्रमश: दूसरी विषम संख्या तथा तीसरी अभाज्य संख्या हैं। दस हजार के स्थान का अंक दहाई के स्थान के अंक का दुगुना है। मैं कौन हूँ?
दो धनात्मक संख्याओं का योगफल 45 है, और उनका अंतर 19 है। संख्याएं ज्ञात कीजिए।
निर्देश- प्रश्न संख्या (177 से 184) निम्नलिखितं गद्यांशं पठित्वा अष्टप्रश्नानां उत्तराणि समुचितं विकल्पं चित्वा देयानि- कश्चित् गोमायुर्नाम शृंगाल: क्षुत्क्षामकण्ठ: इतस्तत: परिभ्रमन् वने सैन्यद्वयसंग्रामभूमिमपश्यत् । तस्याञ्च दुन्दुभे: पतितस्य वायुवशात् वल्ली शाखाग्रै: हन्यमानस्य शब्दमशृणोत्। अथ क्षुभितहृदयश्चिन्तयामास। अहो! विनष्टोअस्मि । तद्यावत् न अस्य प्रोच्चारितशब्दस्य दृष्टिगोचरे गच्छामि तावत् अन्यतो व्रजामि। अथवा नैतत् युज्यते सहसैव पितृपैतामहं वनं त्यत्कृम । उक्तञ्च- भये वा यदि वा हर्षे सम्प्राप्ते यो विमर्शयेत् । कृत्यं न कुरुते वेगान्न स सन्तापमाप्नुयात् ।। तत् तावत् जानामि कस्य अयं शब्द:। धैर्य्यमालम्ब्य विमर्शयन् यावत् मन्दं मन्दं गच्छति तावत् दुन्दुभिम् अपश्यत् । स च तं परिज्ञाय समीपं गत्वा स्वयमेव कौतुकात् अताडयत् । भूयश्च हर्षात् अचिन्तयत्। ‘‘अहो! चिरादेतत् अस्माकं महत् भोजनमापतितम्, तत् नूनं प्रभूतमांसमेदोऽसृग्भि: परिपूरितं भविष्यति’’। तत: परुषचर्मावगुंठितं तत्कथमपि विदैरिय्या एकदेशे छिद्रं कृत्वा संहृष्टमना मध्ये प्रविष्ट: परं चर्मविदारणतोदंष्ट्रा भङ्ग: समजनि। अथ निराशीभूत: तत् दारुशेषमवलोक्य श्लोकमेनमपठत् । ‘‘पूर्वमेव मया ज्ञातम्’’ इति। ततो न शब्दमात्रात् भेतव्यम्’’। पिङ्गलक आह- ‘‘भो:! पश्य अयं मम सर्वोऽपि परिग्रहो भयव्याकुलितमना: पलायितुमिच्छति। तत् कथमहं धैर्य्यवष्टम्भं करोमि’’। सोऽब्रवीत् - ‘‘स्वामिन! नैषामेष दोषो यत: स्वामिसदृशा एव भवन्ति भृत्या:’’।
Who among the following was the ruler of Gujarat when Humayun attacked the kingdom in 1532?/निम्नलिखित में से कौन गुजरात का तब शासक था, जब हुमायूँ ने 1532 में राज्य पर आक्रमण किया था?
Explanations:
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