Correct Answer:
Option B - कुंड विधि (Furrow method)– एक पंक्ति में बोई गयी फसलों के लिए कुंड विधि अधिक उपयुक्त रहती है। इस विधि के अन्तर्गत खेत में छोटी-छोटी मेढ़ें व कुंड क्रमानुसार एक के बाद एक बनाये जाते हैं और सभी कुंडों को आपस में जोड़ दिया जाता है। मेढ़ों पर पौधे बोये जाते हैं और इनकी सिंचाई के लिए कुंडों में पानी छोड़ा जाता है। यह विधि नर्म मिट्टी में अधिक अपनायी जाती है तथा उन फसलों के लिए जिनके पौधें कतारों में लगाये जाते हैं उत्तम होती हैं। आलू, मूँगफली, प्याज, लहसुन, इत्यादि फसलों के लिए यह विधि अपनायी जाती है। यह विधि लहरिया विधि (Corrugation method) के नाम से भी जानी जाती है।
B. कुंड विधि (Furrow method)– एक पंक्ति में बोई गयी फसलों के लिए कुंड विधि अधिक उपयुक्त रहती है। इस विधि के अन्तर्गत खेत में छोटी-छोटी मेढ़ें व कुंड क्रमानुसार एक के बाद एक बनाये जाते हैं और सभी कुंडों को आपस में जोड़ दिया जाता है। मेढ़ों पर पौधे बोये जाते हैं और इनकी सिंचाई के लिए कुंडों में पानी छोड़ा जाता है। यह विधि नर्म मिट्टी में अधिक अपनायी जाती है तथा उन फसलों के लिए जिनके पौधें कतारों में लगाये जाते हैं उत्तम होती हैं। आलू, मूँगफली, प्याज, लहसुन, इत्यादि फसलों के लिए यह विधि अपनायी जाती है। यह विधि लहरिया विधि (Corrugation method) के नाम से भी जानी जाती है।