Explanations:
निस्सरण के मापन की अप्रत्यक्ष विधि: इस विधि में हम ऐसी तकनीक (Technique) का उपयोग करते है, जिससे निस्सरण और गहराई के मध्य संबंध की सहायता से निस्सरण का पता लगाया जाता है। इस विधि का व्यापक वर्गीकरण– (i) प्रवाह मापन संरचना(Flow measurement structure) (ii) ढलान क्षेत्रफल विधि (Slope area method) ढ़लान क्षेत्रफल विधि (Slope area method)- इस विधि में हम मैनिंग के समीकरण की सहायता से निस्सरण का पता लगाते है। इस समीकरण का उपयोग नदी के पाट के किसी भी सिरे पर गहराई और उस पाट पर बाढ निस्सरण को संबंधित करने के लिये किया जाता है और इस प्रकार हम गहराई को ज्ञात करके निस्सरण का पता लगाा सकते है। पाट का चयन ढ़लान क्षेत्रफल का मुख्य भाग है। निम्न मानदण्डों का किया जाता है। उच्च जल चिन्हों की यथार्थता अच्छी होनी चाहिये पाट जितना संभव हो सके उतना सीधा और एक समान होना चाहिये, यदि संभव नही तो उत्तरोत्तर संकुचित भाग का चयन करना चाहिए। जैसे-जैसे पाट की लम्बाई बढ़ती है, निस्सरण के मापन में यथार्थता भी बढ़ती है। एक पाट की लम्बाई माध्य गहराई से 75 गुना अधिक होनी चाहिये।