Correct Answer:
Option C - आवृतबीजी पौधों में परागकण (Pollengrain) ही नर युग्मकोद्भिद् है जो सम्पूर्ण रूप से परागकोश के प्रस्फुटन के बाद किसी प्रकार उसी पुष्प अथवा उसी जाति के अन्य पुष्प के जायाँवा के वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते है। यह क्रिया परागण कहलाती है।
C. आवृतबीजी पौधों में परागकण (Pollengrain) ही नर युग्मकोद्भिद् है जो सम्पूर्ण रूप से परागकोश के प्रस्फुटन के बाद किसी प्रकार उसी पुष्प अथवा उसी जाति के अन्य पुष्प के जायाँवा के वर्तिकाग्र पर पहुँच जाते है। यह क्रिया परागण कहलाती है।