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Q: The flat plains along the Sub-Himalayan region in North India are called:/उत्तर भारत में उप हिमालय क्षेत्र के सहारे फैले समतल मैदान को कहा जाता है ─
  • A. Terai/तराई
  • B. Doon/दून
  • C. Khadar/खादर
  • D. Bhabar/भाबर
Correct Answer: Option D - उत्तर भारत में उपहिमालय (शिवालिक श्रेणी) क्षेत्र के सहारे पैâले समतल मैदान को भाबर कहा जाता है। इस मैदान का विस्तार सिन्धु नदी से लेकर तिस्ता नदी तक पाया जाता है। भाबर मैदान को शिवालिक का जलोढ़ पंख कहा जाता है। भावर क्षेत्र 8 से 16 किमी. की चौड़ाई वाली संकरी पट्टी के रूप में स्थित है। शिवालिक के गिरिपाद में स्थित होने के कारण यहाँ नदियाँ बड़ी मात्रा में पत्थर, कंकड़, बजरी आदि लाकर जमा कर देती हैं जिससे पारगम्य चट्टानों का निर्माण होता है। नदियाँ भाबर क्षेत्र में भूमिगत होने के कारण अदृश्य हो जाती हैं। यह क्षेत्र कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है।
D. उत्तर भारत में उपहिमालय (शिवालिक श्रेणी) क्षेत्र के सहारे पैâले समतल मैदान को भाबर कहा जाता है। इस मैदान का विस्तार सिन्धु नदी से लेकर तिस्ता नदी तक पाया जाता है। भाबर मैदान को शिवालिक का जलोढ़ पंख कहा जाता है। भावर क्षेत्र 8 से 16 किमी. की चौड़ाई वाली संकरी पट्टी के रूप में स्थित है। शिवालिक के गिरिपाद में स्थित होने के कारण यहाँ नदियाँ बड़ी मात्रा में पत्थर, कंकड़, बजरी आदि लाकर जमा कर देती हैं जिससे पारगम्य चट्टानों का निर्माण होता है। नदियाँ भाबर क्षेत्र में भूमिगत होने के कारण अदृश्य हो जाती हैं। यह क्षेत्र कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है।

Explanations:

उत्तर भारत में उपहिमालय (शिवालिक श्रेणी) क्षेत्र के सहारे पैâले समतल मैदान को भाबर कहा जाता है। इस मैदान का विस्तार सिन्धु नदी से लेकर तिस्ता नदी तक पाया जाता है। भाबर मैदान को शिवालिक का जलोढ़ पंख कहा जाता है। भावर क्षेत्र 8 से 16 किमी. की चौड़ाई वाली संकरी पट्टी के रूप में स्थित है। शिवालिक के गिरिपाद में स्थित होने के कारण यहाँ नदियाँ बड़ी मात्रा में पत्थर, कंकड़, बजरी आदि लाकर जमा कर देती हैं जिससे पारगम्य चट्टानों का निर्माण होता है। नदियाँ भाबर क्षेत्र में भूमिगत होने के कारण अदृश्य हो जाती हैं। यह क्षेत्र कृषि के लिए अधिक उपयोगी नहीं है।