Explanations:
मानव की आहार नली की दीवारों के संकुचन और विस्तार की गति क्रमाकुंचन कहलाती है। यह गति मानव की समस्तपाचक नली अर्थात् ग्रासनली से लेकर मलाशय तक होती रहती है जिसके द्वारा मानव के द्वारा खाया हुआ और पाचित आहार निरंतर आगे की ओर अग्रसारित होता रहता है। रक्त वाहिकाओं तथा श्वसनिकाओं में भी इसी प्रकार की गति सम्पन्न होती है