search
Q: The Congress took a critical stand over the Montford Reforms in 1918, which led to break up with the old moderate remnants (Sapru, Jayakar and Chintamani) who formed the 1918 में मोंटफोर्ड सुधारों पर काँग्रेस ने एक महत्वपूर्ण रुख अपनाया, जिसके कारण पुराने उदारवादी अवशेष (सप्रू, जयकर और चिंतामणि) टूट गए, जिन्होंने गठन किया।
  • A. Indian National Liberal Federation इंडियन नैशनल लिबरल फेडरेशन का
  • B. Servants of India Society /भारत सेवक समाज का
  • C. Swaraj Party/स्वराज पार्टी का
  • D. More than one of the above उपर्युक्त में से एक से अधिक
Correct Answer: Option A - 8 जुलाई, 1918 ई. को माण्टेक्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया था कि ब्रिटिश शासन का लक्ष्य स्वशासित संस्थाओं का क्रमिक विकास करना है। कांग्रेस ने इसे असंतोषजनक एवं निराशापूर्ण माना। 17 अगस्त, 1918 को सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में नरमपंथी नेताओं (तेजबहादुर सप्रू, एम.आर.जयकर और चिन्तामणि) ने रिपोर्ट का स्वागत किया और कांग्रेस से अलग होकर ‘राष्ट्रीय उदारवादी संघ’ (नेशनल लिबरल लीग) का गठन किया जो बाद में ‘अखिल भारतीय उदारवादी संघ’ (इंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन ) के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उदारवादियों ने मोंटफोर्ड घोषणा को ‘‘भारत’ का मैगनाकार्टा कहा है।
A. 8 जुलाई, 1918 ई. को माण्टेक्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया था कि ब्रिटिश शासन का लक्ष्य स्वशासित संस्थाओं का क्रमिक विकास करना है। कांग्रेस ने इसे असंतोषजनक एवं निराशापूर्ण माना। 17 अगस्त, 1918 को सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में नरमपंथी नेताओं (तेजबहादुर सप्रू, एम.आर.जयकर और चिन्तामणि) ने रिपोर्ट का स्वागत किया और कांग्रेस से अलग होकर ‘राष्ट्रीय उदारवादी संघ’ (नेशनल लिबरल लीग) का गठन किया जो बाद में ‘अखिल भारतीय उदारवादी संघ’ (इंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन ) के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उदारवादियों ने मोंटफोर्ड घोषणा को ‘‘भारत’ का मैगनाकार्टा कहा है।

Explanations:

8 जुलाई, 1918 ई. को माण्टेक्यू-चेम्सफोर्ड रिपोर्ट प्रकाशित हुई जिसमें कहा गया था कि ब्रिटिश शासन का लक्ष्य स्वशासित संस्थाओं का क्रमिक विकास करना है। कांग्रेस ने इसे असंतोषजनक एवं निराशापूर्ण माना। 17 अगस्त, 1918 को सुरेन्द्रनाथ बनर्जी के नेतृत्व में नरमपंथी नेताओं (तेजबहादुर सप्रू, एम.आर.जयकर और चिन्तामणि) ने रिपोर्ट का स्वागत किया और कांग्रेस से अलग होकर ‘राष्ट्रीय उदारवादी संघ’ (नेशनल लिबरल लीग) का गठन किया जो बाद में ‘अखिल भारतीय उदारवादी संघ’ (इंडियन नेशनल लिबरल फेडरेशन ) के रूप में प्रसिद्ध हुआ। उदारवादियों ने मोंटफोर्ड घोषणा को ‘‘भारत’ का मैगनाकार्टा कहा है।