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Q: ‘‘देवदत्ताय रोचते मोदक: स्वदते च अपूप:।’’ उपर्युक्तवाक्ये प्रीयमाण: क: वर्तते?
  • A. मोदक:।
  • B. देवदत्त:।
  • C. अपूप:।
  • D. स्वदते।
Correct Answer: Option B - ‘‘देवदत्ताय रोचते मोदक: स्वदते च अपूप:।’’ इस वाक्य में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाला) देवदत्त है। ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ सूत्र के आधार पर रुच् धातु तथा इसके समानार्थक धातु के योग में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाले की) की सम्प्रदान सञ्ज्ञा होती है। अत: प्रीयमाण देवदत्त की सम्प्रदान सञ्ज्ञा तथा ‘सम्प्रदाने चतुर्थी’ सूत्र से चतुर्थी विभक्ति होकर देवदत्ताय बना।
B. ‘‘देवदत्ताय रोचते मोदक: स्वदते च अपूप:।’’ इस वाक्य में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाला) देवदत्त है। ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ सूत्र के आधार पर रुच् धातु तथा इसके समानार्थक धातु के योग में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाले की) की सम्प्रदान सञ्ज्ञा होती है। अत: प्रीयमाण देवदत्त की सम्प्रदान सञ्ज्ञा तथा ‘सम्प्रदाने चतुर्थी’ सूत्र से चतुर्थी विभक्ति होकर देवदत्ताय बना।

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‘‘देवदत्ताय रोचते मोदक: स्वदते च अपूप:।’’ इस वाक्य में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाला) देवदत्त है। ‘रुच्यर्थानां प्रीयमाण:’ सूत्र के आधार पर रुच् धातु तथा इसके समानार्थक धातु के योग में प्रीयमाण (प्रसन्न होने वाले की) की सम्प्रदान सञ्ज्ञा होती है। अत: प्रीयमाण देवदत्त की सम्प्रदान सञ्ज्ञा तथा ‘सम्प्रदाने चतुर्थी’ सूत्र से चतुर्थी विभक्ति होकर देवदत्ताय बना।