Correct Answer:
Option D - ‘‘दुष्यन्तेनाहितं तेजो दधानां भूतये भुव:।
अवेहि तनयां ब्रह्मन्नग्निगर्भां शमीमिव।।’’
यज्ञशाला में प्रविष्ट होने पर (कण्व को) अशरीरधारी छन्दोमयी वाणी के द्वारा यह सूचना कण्वेको प्राप्त हुई। जिसका अर्थ है ‘‘ब्रह्मन! दुष्यन्त के द्वारा स्थापित तेज को जगत् के कल्याण के लिए धारण करती हुई अपनी पुत्री के भीतर अग्नि से युक्त शमी लता के समान समझो’’
D. ‘‘दुष्यन्तेनाहितं तेजो दधानां भूतये भुव:।
अवेहि तनयां ब्रह्मन्नग्निगर्भां शमीमिव।।’’
यज्ञशाला में प्रविष्ट होने पर (कण्व को) अशरीरधारी छन्दोमयी वाणी के द्वारा यह सूचना कण्वेको प्राप्त हुई। जिसका अर्थ है ‘‘ब्रह्मन! दुष्यन्त के द्वारा स्थापित तेज को जगत् के कल्याण के लिए धारण करती हुई अपनी पुत्री के भीतर अग्नि से युक्त शमी लता के समान समझो’’