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Q: दलहनी फसलें फसल प्रणाली के लिये उपयुक्त होती हैं, वे हैं
  • A. कम समय वाली फसलें
  • B. रोग रोधी फसलें
  • C. लम्बे समय वाली फसलें
  • D. नमी दबावरोधी फसलें
Correct Answer: Option A - भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखने के लिए फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश जरूरी है, क्योंकि इनकी जड़ों में गाठें पायी जाती है जिसमें राइजोबियम जीवाणु उपस्थित होते हैं, जो वायुमण्डल से नत्रजन ग्रहण कर मिट्टी में एकत्र करते हैं। ये फसलें कम समय में पैदा होने वाली फसलें है, जिससे इन्हें फसल चक्र में आसानी से समावेशित कर सकते हैं, जिससे वर्ष में 2 से 3 फसल आसानी से काट सकते हैं।
A. भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखने के लिए फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश जरूरी है, क्योंकि इनकी जड़ों में गाठें पायी जाती है जिसमें राइजोबियम जीवाणु उपस्थित होते हैं, जो वायुमण्डल से नत्रजन ग्रहण कर मिट्टी में एकत्र करते हैं। ये फसलें कम समय में पैदा होने वाली फसलें है, जिससे इन्हें फसल चक्र में आसानी से समावेशित कर सकते हैं, जिससे वर्ष में 2 से 3 फसल आसानी से काट सकते हैं।

Explanations:

भूमि की उर्वरा शक्ति बनाये रखने के लिए फसल चक्र में दलहनी फसलों का समावेश जरूरी है, क्योंकि इनकी जड़ों में गाठें पायी जाती है जिसमें राइजोबियम जीवाणु उपस्थित होते हैं, जो वायुमण्डल से नत्रजन ग्रहण कर मिट्टी में एकत्र करते हैं। ये फसलें कम समय में पैदा होने वाली फसलें है, जिससे इन्हें फसल चक्र में आसानी से समावेशित कर सकते हैं, जिससे वर्ष में 2 से 3 फसल आसानी से काट सकते हैं।