Correct Answer:
Option B - ‘ठलुआ क्लब’ बाबू गुलाब राय की रचना है। यह एक निबंध संग्रह है। बाबू गुलाब राय की अन्य निबन्ध इस प्रकार हैं–
फिर निराशा क्यों, मेरी असफलताएँ, कुछ उथले कुछ गहरे।
B. ‘ठलुआ क्लब’ बाबू गुलाब राय की रचना है। यह एक निबंध संग्रह है। बाबू गुलाब राय की अन्य निबन्ध इस प्रकार हैं–
फिर निराशा क्यों, मेरी असफलताएँ, कुछ उथले कुछ गहरे।