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Q: दिए गए गद्यांश के आधार पर प्रश्न के उत्तर दीजिए। राजा राममोहन राय हिंदू धर्म में सुधार के हिमायती और उसकी जगह ईसाई धर्म लाने के विरोधी थे। उन्होंने ईसाई धर्म प्रचारकों की हिंदू धर्म दर्शन पर अज्ञानपूर्ण आलोचनाओं का जवाब दिया। साथ ही उन्होंने अन्य धर्मों के प्रति अत्यंत मित्रतापूर्ण रुख अपनाया। उनका विश्वास था कि बुनियादी तौर पर सभी धर्म एक ही संदेश देते हैं कि उनके अनुयायी भाई-भाई हैंं। उन्होंने 1828 में ब्रह्म सभा नाम की एक नई धार्मिक संस्था की स्थापना की जिसको बाद में ब्रह्म समाज कहा गया। इसका उद्देश्य हिंदू धर्म को स्वच्छ बनाना और एकेश्वरवाद की शिक्षा देना था। नई संस्था के दो आधार थे, तर्क शक्ति, वेद तथा उपनिषद। उसे अन्य धर्मों की शिक्षाओं को भी समाहित करना था। ब्रह्म समाज ने मानवीय प्रतिष्ठा पर जोर दिया, मूर्तिपूजा का विरोध किया तथा सती प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों की आलोचना की। वे औरतों के पक्के हिमायती थे। उन्होंने औरतों की परवशता की निंदा की तथा इस प्रचलित विचार का विरोध किया कि औरतें पुरुषों से बुद्धि में या नैतिक दृष्टि से निकृष्ट हैं। उन्होंने बहुविवाह तथा विधवाओं की अवनत स्थिति की आलोचना की। औरतों की स्थिति को सुधारने के लिए उन्होंने माँग की कि उन्हें विरासत और सम्पत्ति संबंधी अधिकार दिए जाएं। राममोहन राय आधुनिक शिक्षा के सबसे प्रारम्भिक प्रचारकों में से थे। वे आधुनिक शिक्षा को देश में आधुनिक विचारों के प्रचार का प्रमुख साधन समझते थे। डेविड हेअर ने 1817 में कलकत्ता में प्रसिद्ध हिंदू कॉलेज की स्थापना की। राजा राममोहन राय ने कलकत्ता में 1817 में अपने खर्च से एक अंग्रेजी स्कूल चलाया जिसमें अन्य विषयों के साथ यांत्रिकी और वाल्तेयर के दर्शन की पढ़ाई होती थी। उन्होंने 1825 में एक वेदांत कॉलेज की स्थापना की जिसमें भारतीय विद्या और पाश्चात्य सामाजिक तथा भौतिक विज्ञानों की पढ़ाई की सुविधाएँ उपलब्ध थीं। राजा राममोहन राय ने 1828 में निम्न में से किस संस्था की स्थापना की?
  • A. प्रार्थना समाज
  • B. ब्रह्म सभा
  • C. ब्रह्म समाज
  • D. आत्मीय सभा
Correct Answer: Option B - राजा राममोहन राय ने 1828 में ‘ब्रम्ह समाज’ की स्थापना की।
B. राजा राममोहन राय ने 1828 में ‘ब्रम्ह समाज’ की स्थापना की।

Explanations:

राजा राममोहन राय ने 1828 में ‘ब्रम्ह समाज’ की स्थापना की।