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Q: ``तवास्मि गीतरागेण हारिणा प्रसभं हृत:। एष राजेव दुष्यन्त: सारङ्गेणातिरंहसा।।'' उपर्युक्त श्लोक किसका उदाहरण है?
  • A. नान्दी
  • B. पताकास्थानक
  • C. बिन्दु
  • D. प्रस्तावना
Correct Answer: Option D - प्रस्तुत श्लोक महाकवि कालिदास के अभिज्ञानशाकुन्तलम् के प्रथम अङ्क का पाँचवाँ श्लोक है। जिसका अर्थ है – ``तुम्हारे गीत के मनोहर राग द्वारा मैं वैसे ही बलपूर्वक खींच लिया गया हूँ जैसे द्रुतगामी मृग के द्वारा राजा दुष्यन्त (खींच लिये गये हैं)। प्रस्तुत श्लोक `प्रस्तावना' का उदाहरण है।
D. प्रस्तुत श्लोक महाकवि कालिदास के अभिज्ञानशाकुन्तलम् के प्रथम अङ्क का पाँचवाँ श्लोक है। जिसका अर्थ है – ``तुम्हारे गीत के मनोहर राग द्वारा मैं वैसे ही बलपूर्वक खींच लिया गया हूँ जैसे द्रुतगामी मृग के द्वारा राजा दुष्यन्त (खींच लिये गये हैं)। प्रस्तुत श्लोक `प्रस्तावना' का उदाहरण है।

Explanations:

प्रस्तुत श्लोक महाकवि कालिदास के अभिज्ञानशाकुन्तलम् के प्रथम अङ्क का पाँचवाँ श्लोक है। जिसका अर्थ है – ``तुम्हारे गीत के मनोहर राग द्वारा मैं वैसे ही बलपूर्वक खींच लिया गया हूँ जैसे द्रुतगामी मृग के द्वारा राजा दुष्यन्त (खींच लिये गये हैं)। प्रस्तुत श्लोक `प्रस्तावना' का उदाहरण है।