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Q: `त्वं जीवितं त्वमसि में हृदयं द्वितीयम्–।' उत्तररामचरित में यह किसकी उक्ति है –
  • A. वासन्ती
  • B. तमसा
  • C. मुरला
  • D. सीता
Correct Answer: Option A - ‘त्वं जीवितं त्वमसि मे हृदयं द्वितीयम्’ यह उक्ति वासन्ती की है। वासन्ती सीता के निर्वसन से आहत होकर राम को उलाहना दे रही है कि पूर्व में आप सीता को कहते थे कि – ‘तुम मेरा जीवन हो, तुम मेरा दूसरा हृदय हो।’ और आपने उसी का परित्याग क्यों कर दिया।
A. ‘त्वं जीवितं त्वमसि मे हृदयं द्वितीयम्’ यह उक्ति वासन्ती की है। वासन्ती सीता के निर्वसन से आहत होकर राम को उलाहना दे रही है कि पूर्व में आप सीता को कहते थे कि – ‘तुम मेरा जीवन हो, तुम मेरा दूसरा हृदय हो।’ और आपने उसी का परित्याग क्यों कर दिया।

Explanations:

‘त्वं जीवितं त्वमसि मे हृदयं द्वितीयम्’ यह उक्ति वासन्ती की है। वासन्ती सीता के निर्वसन से आहत होकर राम को उलाहना दे रही है कि पूर्व में आप सीता को कहते थे कि – ‘तुम मेरा जीवन हो, तुम मेरा दूसरा हृदय हो।’ और आपने उसी का परित्याग क्यों कर दिया।