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Q: ‘‘तद्दोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुन: क्वापि’’ यह काव्यलक्षण किस आचार्य द्वारा निरुपित है?
  • A. पण्डितराज जगन्नाथ
  • B. मम्मट
  • C. दण्डी
  • D. महिमभट्ट
Correct Answer: Option B - ‘‘तद्दोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुन: क्वापि’’ यह काव्यलक्षण आचार्य ‘मम्मट’ द्वारा निरुपित है जबकि अन्य आचार्यों के काव्यलक्षण इस प्रकार हैं– आचार्य काव्यलक्षण पण्डितराज जगन्नाथ रमणीयार्थ प्रतिपादक: शब्द: काव्यम् दण्डी शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली
B. ‘‘तद्दोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुन: क्वापि’’ यह काव्यलक्षण आचार्य ‘मम्मट’ द्वारा निरुपित है जबकि अन्य आचार्यों के काव्यलक्षण इस प्रकार हैं– आचार्य काव्यलक्षण पण्डितराज जगन्नाथ रमणीयार्थ प्रतिपादक: शब्द: काव्यम् दण्डी शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली

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‘‘तद्दोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलंकृती पुन: क्वापि’’ यह काव्यलक्षण आचार्य ‘मम्मट’ द्वारा निरुपित है जबकि अन्य आचार्यों के काव्यलक्षण इस प्रकार हैं– आचार्य काव्यलक्षण पण्डितराज जगन्नाथ रमणीयार्थ प्रतिपादक: शब्द: काव्यम् दण्डी शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली