Correct Answer:
Option B - त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने: नम:’’ यह पद्यांश कादम्बरी कथामुख से उद्धृत है। महाकवि बाणभट्ट विरचित ‘कादम्बरी’ के प्रथम मङ्गलाचरण में त्रिगुणमयपरब्रह्म की वन्दना की गयी है। कादम्बरी कथामुख- प्रकरण में नमस्कारात्मक मङ्गलाचरण इस प्रकार है - रजोजुषे जन्मनि सत्ववृत्तये स्थितौ प्रजानां प्रलये तम: स्पृशे।
अजाय सर्गस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने नम:।।
अर्थात् - सृष्टि के उत्पत्ति के समय रजोगुण (ब्रह्मस्वरूप), स्थितिकाल-सत्त्वगुण युक्त (शिवस्वरूप) के कारण भूत: वेदत्रयीमय (ऋक् , यजु, साम) त्रिगुणस्वरूपी एवं अजन्मा (परब्रह्म) को नमस्कार है।
B. त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने: नम:’’ यह पद्यांश कादम्बरी कथामुख से उद्धृत है। महाकवि बाणभट्ट विरचित ‘कादम्बरी’ के प्रथम मङ्गलाचरण में त्रिगुणमयपरब्रह्म की वन्दना की गयी है। कादम्बरी कथामुख- प्रकरण में नमस्कारात्मक मङ्गलाचरण इस प्रकार है - रजोजुषे जन्मनि सत्ववृत्तये स्थितौ प्रजानां प्रलये तम: स्पृशे।
अजाय सर्गस्थितिनाशहेतवे त्रयीमयाय त्रिगुणात्मने नम:।।
अर्थात् - सृष्टि के उत्पत्ति के समय रजोगुण (ब्रह्मस्वरूप), स्थितिकाल-सत्त्वगुण युक्त (शिवस्वरूप) के कारण भूत: वेदत्रयीमय (ऋक् , यजु, साम) त्रिगुणस्वरूपी एवं अजन्मा (परब्रह्म) को नमस्कार है।