Correct Answer:
Option D - त्रिविक्रमभट्ट ने नलचम्पू में सबसे पहले भगवान शंकर का स्तवन किया।
नलचम्पू के प्रथम उच्छ्वास का मंगलाचरण इस प्रकार है -
‘‘जयति गिरि सुताया: कामसन्तापवाहिन्युरसि रसनिषेकश्चान्दनश्चन्द्रमौलि:।
तदनु च विजयन्ते कीर्तिभावां कवीनामसवृदभृतबिन्दुस्यन्दिनो वाग्विलासा:।।’’
- नलचम्पू के द्वितीय उच्छ्वास में ‘कामदेव’ की स्तुति की गयी है।
D. त्रिविक्रमभट्ट ने नलचम्पू में सबसे पहले भगवान शंकर का स्तवन किया।
नलचम्पू के प्रथम उच्छ्वास का मंगलाचरण इस प्रकार है -
‘‘जयति गिरि सुताया: कामसन्तापवाहिन्युरसि रसनिषेकश्चान्दनश्चन्द्रमौलि:।
तदनु च विजयन्ते कीर्तिभावां कवीनामसवृदभृतबिन्दुस्यन्दिनो वाग्विलासा:।।’’
- नलचम्पू के द्वितीय उच्छ्वास में ‘कामदेव’ की स्तुति की गयी है।