Correct Answer:
Option B - तारे रात को नक्षत्र प्रकाश के वायुमण्डलीय अपवर्तन के कारण टिमटिमाते हैं। पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के पृष्ठ पर पहुंचने तक तारे का प्रकाश निरन्तर अपवर्तित होता जाता है, चूंकि वायु की परतें स्थिर नहीं होती, इसलिए हमें यह महसूस होता है कि तारे भिन्न-भिन्न समयान्तरालों में भिन्न-भिन्न स्थितियों में हैं यही कारण है कि तारे हमें टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं। तारों का अपना प्रकाश होता है। सूर्य एक तारा है।
B. तारे रात को नक्षत्र प्रकाश के वायुमण्डलीय अपवर्तन के कारण टिमटिमाते हैं। पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के पृष्ठ पर पहुंचने तक तारे का प्रकाश निरन्तर अपवर्तित होता जाता है, चूंकि वायु की परतें स्थिर नहीं होती, इसलिए हमें यह महसूस होता है कि तारे भिन्न-भिन्न समयान्तरालों में भिन्न-भिन्न स्थितियों में हैं यही कारण है कि तारे हमें टिमटिमाते हुए प्रतीत होते हैं। तारों का अपना प्रकाश होता है। सूर्य एक तारा है।