Correct Answer:
Option C - अभिधम्म पिटक में बौद्ध मतों की दार्शनिक व्याख्या की गई है। इस पिटक का संकलन अशोक के समय में हुए तृतीय बौद्ध संगीति में मोग्गालिपुत्तिस्स ने किया था। ये हीनयानी थे। अभिधम्म पिटक में कुल सात ग्रन्थ सम्मिलित है। इन्हें सप्त प्रकरण कहा जाता है, (1) धम्म संगनि (2) विभंग (3) धातु कथा (4) पुग्गल पंगति (5) कथावत्थु (6) यमक (7) पठ्ठान जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ कथावत्थु है, जिसकी रचना स्वयं मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की है।
C. अभिधम्म पिटक में बौद्ध मतों की दार्शनिक व्याख्या की गई है। इस पिटक का संकलन अशोक के समय में हुए तृतीय बौद्ध संगीति में मोग्गालिपुत्तिस्स ने किया था। ये हीनयानी थे। अभिधम्म पिटक में कुल सात ग्रन्थ सम्मिलित है। इन्हें सप्त प्रकरण कहा जाता है, (1) धम्म संगनि (2) विभंग (3) धातु कथा (4) पुग्गल पंगति (5) कथावत्थु (6) यमक (7) पठ्ठान जिसमें सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ कथावत्थु है, जिसकी रचना स्वयं मोग्गलिपुत्त तिस्स ने की है।