Correct Answer:
Option B - अमीर तैमूर को भाग्यशाली भविष्य का स्वामी कहा जाता है। एक युद्ध में उसका एक पैर घायल हो गया था, जिसके कारण वह जीवन भर लंगड़ाता रहा, इसलिए उसे तैमूर लंग कहा जाता था। मार्च अप्रैल 1398 ई० में तैमूर अपनी राजधानी समरकंद से भारत पर आक्रमण के लिए रवाना हुआ। 11 दिसम्बर1398 को तैमूर दिल्ली पहुँचा। उस समय दिल्ली का शासक नासिरुद्दीन महमूद (तुगलक वंश का अंतिम शासक) था। 18 दिसम्बर 1398 ई० को तैमूर व दिल्ली की शाही सेना के मध्य युद्ध हुआ। नासिरुद्दीन महमूद व मल्लू इकबाल पराजित हुए। तैमूर ने दिल्ली में कत्लेआम का आदेश दिया जो 15 दिन तक चलता रहा। अकूत सम्पत्ति लूटने के बाद 1399 ई० में तैमूर फिरोजाबाद, मेरठ, हरिद्वार, कांगड़ा और जम्मू होते हुए वापस समरकन्द लौट गया। जाने से पहले उसने खिङ्का खाँ को मुल्तान, लाहौर और दीपालपुर का सूबेदार नियुक्त किया।
B. अमीर तैमूर को भाग्यशाली भविष्य का स्वामी कहा जाता है। एक युद्ध में उसका एक पैर घायल हो गया था, जिसके कारण वह जीवन भर लंगड़ाता रहा, इसलिए उसे तैमूर लंग कहा जाता था। मार्च अप्रैल 1398 ई० में तैमूर अपनी राजधानी समरकंद से भारत पर आक्रमण के लिए रवाना हुआ। 11 दिसम्बर1398 को तैमूर दिल्ली पहुँचा। उस समय दिल्ली का शासक नासिरुद्दीन महमूद (तुगलक वंश का अंतिम शासक) था। 18 दिसम्बर 1398 ई० को तैमूर व दिल्ली की शाही सेना के मध्य युद्ध हुआ। नासिरुद्दीन महमूद व मल्लू इकबाल पराजित हुए। तैमूर ने दिल्ली में कत्लेआम का आदेश दिया जो 15 दिन तक चलता रहा। अकूत सम्पत्ति लूटने के बाद 1399 ई० में तैमूर फिरोजाबाद, मेरठ, हरिद्वार, कांगड़ा और जम्मू होते हुए वापस समरकन्द लौट गया। जाने से पहले उसने खिङ्का खाँ को मुल्तान, लाहौर और दीपालपुर का सूबेदार नियुक्त किया।