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Q: ``तुम कुसुमपुर को जाओ''–का सही संस्कृत रूप है :
  • A. गच्छ त्वं कुसुमपुरं
  • B. त्वं कुसुमपुर गच्छेत्
  • C. त्वां कुसुमपुरं गच्छेय
  • D. कुसुमपुरमं त्वां गच्छ
Correct Answer: Option A - `तुम कुसुमपुर को जाओ' का सही संस्कृत रूप गच्छ त्वं कुसुमपुरम् होगा। कर्तुरीाप्सिमं कर्म। कर्मणि द्वितीया। जिसके ऊपर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। कर्म कारक का चिन्ह को है। प्रस्तुत वाक्य में जाने के व्यापार का फल कुसुमपुरम् पर पड़ रहा है। अत: कर्म कारक के कारण कुसुमपुरं होगा। आज्ञार्थक वाच्य होने के कारण लोट् लकार का प्रयोग हुआ है।
A. `तुम कुसुमपुर को जाओ' का सही संस्कृत रूप गच्छ त्वं कुसुमपुरम् होगा। कर्तुरीाप्सिमं कर्म। कर्मणि द्वितीया। जिसके ऊपर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। कर्म कारक का चिन्ह को है। प्रस्तुत वाक्य में जाने के व्यापार का फल कुसुमपुरम् पर पड़ रहा है। अत: कर्म कारक के कारण कुसुमपुरं होगा। आज्ञार्थक वाच्य होने के कारण लोट् लकार का प्रयोग हुआ है।

Explanations:

`तुम कुसुमपुर को जाओ' का सही संस्कृत रूप गच्छ त्वं कुसुमपुरम् होगा। कर्तुरीाप्सिमं कर्म। कर्मणि द्वितीया। जिसके ऊपर क्रिया के व्यापार का फल पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। कर्म कारक का चिन्ह को है। प्रस्तुत वाक्य में जाने के व्यापार का फल कुसुमपुरम् पर पड़ रहा है। अत: कर्म कारक के कारण कुसुमपुरं होगा। आज्ञार्थक वाच्य होने के कारण लोट् लकार का प्रयोग हुआ है।