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Q: तुलसीदास ने कौन-सी रचना अपनी शारीरिक पीड़ा के निवारणार्थ की थी?
  • A. विनयपत्रिका
  • B. हनुमान बाहुक
  • C. रामचरित मानस
  • D. जानकी मंगल
Correct Answer: Option B - तुलसीदास ने ‘हनुमान बाहुक’ की रचना अपनी शारीरिक पीड़ा के निवारणार्थ की थी। यह तुलसीदास की हनुमत-भक्ति संबंधी स्वतंत्र रचना है। रामचरितमानस, रामललानहछू, बरवै रामायण, पार्वती मंगल, दोहावली, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक ऐसी अन्य अनेक प्रमुख रचनाएँ है जिन्होंने तुलसीदास को हिन्दी साहित्य का ही नहीं अपितु भारतीय जन-मानस के पटल पर अमर बना दिया है।
B. तुलसीदास ने ‘हनुमान बाहुक’ की रचना अपनी शारीरिक पीड़ा के निवारणार्थ की थी। यह तुलसीदास की हनुमत-भक्ति संबंधी स्वतंत्र रचना है। रामचरितमानस, रामललानहछू, बरवै रामायण, पार्वती मंगल, दोहावली, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक ऐसी अन्य अनेक प्रमुख रचनाएँ है जिन्होंने तुलसीदास को हिन्दी साहित्य का ही नहीं अपितु भारतीय जन-मानस के पटल पर अमर बना दिया है।

Explanations:

तुलसीदास ने ‘हनुमान बाहुक’ की रचना अपनी शारीरिक पीड़ा के निवारणार्थ की थी। यह तुलसीदास की हनुमत-भक्ति संबंधी स्वतंत्र रचना है। रामचरितमानस, रामललानहछू, बरवै रामायण, पार्वती मंगल, दोहावली, कवितावली, गीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक ऐसी अन्य अनेक प्रमुख रचनाएँ है जिन्होंने तुलसीदास को हिन्दी साहित्य का ही नहीं अपितु भारतीय जन-मानस के पटल पर अमर बना दिया है।