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Q: ``तेजोद्वयस्य युगपद्व्यसनोदयाभ्यां लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।'' यह किस पात्र का कथन है?
  • A. काश्यप का
  • B. कण्वशिष्य का
  • C. अनसूया का
  • D. प्रियंवदा का
Correct Answer: Option B - ``तेजोद्वयस्य युगपद्व्यसनोदयाभ्यां लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।'' यह कण्वशिष्य का कथन है। यह अभिज्ञान शाकुन्तल के चतुर्थ अङ्क से लिया गया है। इसका आशय है- यह संसार दो तेजों के एक साथ अस्त और उदय के द्वारा मानो अपने दशा-विशेषों में नियंत्रित हो रहा है।
B. ``तेजोद्वयस्य युगपद्व्यसनोदयाभ्यां लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।'' यह कण्वशिष्य का कथन है। यह अभिज्ञान शाकुन्तल के चतुर्थ अङ्क से लिया गया है। इसका आशय है- यह संसार दो तेजों के एक साथ अस्त और उदय के द्वारा मानो अपने दशा-विशेषों में नियंत्रित हो रहा है।

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``तेजोद्वयस्य युगपद्व्यसनोदयाभ्यां लोको नियम्यत इवात्मदशान्तरेषु।।'' यह कण्वशिष्य का कथन है। यह अभिज्ञान शाकुन्तल के चतुर्थ अङ्क से लिया गया है। इसका आशय है- यह संसार दो तेजों के एक साथ अस्त और उदय के द्वारा मानो अपने दशा-विशेषों में नियंत्रित हो रहा है।