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Q: Sickle-cell anemia is a disease caused due to the abnormality in/दात्र-कोशिका अरक्तता रोग किसकी अपसामान्यता के कारण होता है?
  • A. white blood cells/श्वेत रुधिर कोशिका
  • B. red blood cells/लाल रुधिर कोशिका
  • C. thrombocytes/बिम्बाणु
  • D. blood plasma composition/रुधिर प्लाज्मा संयोजन
Correct Answer: Option B - दात्र-कोशिका अरक्तता एक आनुवांशिक रोग है, जिसमें लाल रुधिर कोशिकाओं का निर्माण गोलाकार न होकर हसियानुमा (सिकल-फॉर्म) होता है। इन विकृत कोशिकाओं को दात्र-कोशिका (सिकल-सेल्स) कहते हैं। इनका जीवनकाल 10-20 दिन का होता है, जबकि सामान्य लाल रुधिर कोशिका का जीवनकाल 120 दिन होता है। ये विकृत कोशिकायें रुधिर वाहिनियों में आड़ी तिरछी जमा होकर कई स्थानों पर अवरोधक (ब्लॉकेज) बना देती है जिससे खून के प्रवाह में रुकावट आने से ऑक्सीजन की कमी के कारण अंग कमजोर व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। दूसरी ओर इन कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन वर्णक-एस (hb-S) की मात्रा भी कम होने से ये शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाती हैं। उक्त कारणों से इस रोग से ग्रसित व्यक्ति अक्सर युवावस्था में ही मर जाता है।
B. दात्र-कोशिका अरक्तता एक आनुवांशिक रोग है, जिसमें लाल रुधिर कोशिकाओं का निर्माण गोलाकार न होकर हसियानुमा (सिकल-फॉर्म) होता है। इन विकृत कोशिकाओं को दात्र-कोशिका (सिकल-सेल्स) कहते हैं। इनका जीवनकाल 10-20 दिन का होता है, जबकि सामान्य लाल रुधिर कोशिका का जीवनकाल 120 दिन होता है। ये विकृत कोशिकायें रुधिर वाहिनियों में आड़ी तिरछी जमा होकर कई स्थानों पर अवरोधक (ब्लॉकेज) बना देती है जिससे खून के प्रवाह में रुकावट आने से ऑक्सीजन की कमी के कारण अंग कमजोर व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। दूसरी ओर इन कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन वर्णक-एस (hb-S) की मात्रा भी कम होने से ये शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाती हैं। उक्त कारणों से इस रोग से ग्रसित व्यक्ति अक्सर युवावस्था में ही मर जाता है।

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दात्र-कोशिका अरक्तता एक आनुवांशिक रोग है, जिसमें लाल रुधिर कोशिकाओं का निर्माण गोलाकार न होकर हसियानुमा (सिकल-फॉर्म) होता है। इन विकृत कोशिकाओं को दात्र-कोशिका (सिकल-सेल्स) कहते हैं। इनका जीवनकाल 10-20 दिन का होता है, जबकि सामान्य लाल रुधिर कोशिका का जीवनकाल 120 दिन होता है। ये विकृत कोशिकायें रुधिर वाहिनियों में आड़ी तिरछी जमा होकर कई स्थानों पर अवरोधक (ब्लॉकेज) बना देती है जिससे खून के प्रवाह में रुकावट आने से ऑक्सीजन की कमी के कारण अंग कमजोर व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। दूसरी ओर इन कोशिकाओं में हीमोग्लोबिन वर्णक-एस (hb-S) की मात्रा भी कम होने से ये शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में नहीं कर पाती हैं। उक्त कारणों से इस रोग से ग्रसित व्यक्ति अक्सर युवावस्था में ही मर जाता है।