Correct Answer:
Option D - शिवोऽर्च्य: पद का सन्धि विच्छेद– शिवस् + अर्च्य: होगा। शिवस् + अर्च्य में ‘ससजुषो रु:’ सूत्र से शिवस् के स् को रु होकर ‘शिव रु + अर्च्य: बना अब ‘अतोरोरप्लुतादप्लुते’ सूत्र से रु को उ होकर शिव उ + अर्च्य: हुआ, इसके बाद ‘आदगुण:’ सूत्र से गुण ‘ओ’ होकर शिवो + अर्च्य हुआ तथा ‘एङ:पदान्तादति’ सूत्र से पूर्व रूप होकर शिवोऽर्च्य: बना।
D. शिवोऽर्च्य: पद का सन्धि विच्छेद– शिवस् + अर्च्य: होगा। शिवस् + अर्च्य में ‘ससजुषो रु:’ सूत्र से शिवस् के स् को रु होकर ‘शिव रु + अर्च्य: बना अब ‘अतोरोरप्लुतादप्लुते’ सूत्र से रु को उ होकर शिव उ + अर्च्य: हुआ, इसके बाद ‘आदगुण:’ सूत्र से गुण ‘ओ’ होकर शिवो + अर्च्य हुआ तथा ‘एङ:पदान्तादति’ सूत्र से पूर्व रूप होकर शिवोऽर्च्य: बना।