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Q: शीत ऋतु में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा होने का कारण है-
  • A. लौटते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून
  • B. दक्षिण-पश्चिम मानसून
  • C. पश्चिमी विक्षोभ
  • D. उपर्युक्त में से एक से अधिक
  • E. उपर्युक्त में से कोई नहीं
Correct Answer: Option E - शीत ऋतु में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा उत्तर-पूर्व मानसून के कारण होती है। तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता है। अत: यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा बहुत ही कम वर्षा होती है। शीत ऋतु को मानसून प्रत्यावर्तन का काल कहा जाता है। इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में उष्ण-कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। इन चक्रवातों से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मुख्यत: ओडिशा एवं आंध्र प्रदेश तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र में वर्षा होती है। प्रत्यावर्ती मानसून से सबसे अधिक वर्षा तमिलनाडु में होती है।
E. शीत ऋतु में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा उत्तर-पूर्व मानसून के कारण होती है। तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता है। अत: यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा बहुत ही कम वर्षा होती है। शीत ऋतु को मानसून प्रत्यावर्तन का काल कहा जाता है। इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में उष्ण-कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। इन चक्रवातों से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मुख्यत: ओडिशा एवं आंध्र प्रदेश तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र में वर्षा होती है। प्रत्यावर्ती मानसून से सबसे अधिक वर्षा तमिलनाडु में होती है।

Explanations:

शीत ऋतु में तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में वर्षा उत्तर-पूर्व मानसून के कारण होती है। तमिलनाडु पश्चिमी घाट के पर्वत वृष्टि छाया क्षेत्र में पड़ता है। अत: यहाँ दक्षिण-पश्चिम मानसून द्वारा बहुत ही कम वर्षा होती है। शीत ऋतु को मानसून प्रत्यावर्तन का काल कहा जाता है। इस ऋतु में बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में उष्ण-कटिबंधीय चक्रवातों की उत्पत्ति होती है। इन चक्रवातों से पूर्वी तटीय क्षेत्रों में मुख्यत: ओडिशा एवं आंध्र प्रदेश तथा पश्चिमी तटीय क्षेत्र में वर्षा होती है। प्रत्यावर्ती मानसून से सबसे अधिक वर्षा तमिलनाडु में होती है।