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Q: शुष्क (Arid) ) और अर्द्ध-शुष्क (Semi-arid) क्षेत्र अधिक उपयुक्त होते हैं–
  • A. जल अपरदन (Water erosion) के लिए
  • B. वायु अपरदन (Wind erosion) के लिए
  • C. जल व वायु अपरदन दोनों के लिए
  • D. इनमें से किसी के लिए भी नहीं
Correct Answer: Option B - शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वायु द्वारा मृदा एक स्थान से काटकर दूसरे स्थान पर पहुँचा दी जाती है। मरूस्थलीय क्षेत्रों में वायु क्षरण एक भयंकर समस्या है। इन क्षेत्रों में वनस्पतियों के अत्यन्त विरल होने के कारण वायु तीव्र और निर्बाध वेग से बहती है तथा भूमि पृष्ठ का अपघर्षण करती है। फलत: मिट्टी के कण कटकर वायु के प्रवाह द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित हो जाते हैं।
B. शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वायु द्वारा मृदा एक स्थान से काटकर दूसरे स्थान पर पहुँचा दी जाती है। मरूस्थलीय क्षेत्रों में वायु क्षरण एक भयंकर समस्या है। इन क्षेत्रों में वनस्पतियों के अत्यन्त विरल होने के कारण वायु तीव्र और निर्बाध वेग से बहती है तथा भूमि पृष्ठ का अपघर्षण करती है। फलत: मिट्टी के कण कटकर वायु के प्रवाह द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित हो जाते हैं।

Explanations:

शुष्क और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों में वायु द्वारा मृदा एक स्थान से काटकर दूसरे स्थान पर पहुँचा दी जाती है। मरूस्थलीय क्षेत्रों में वायु क्षरण एक भयंकर समस्या है। इन क्षेत्रों में वनस्पतियों के अत्यन्त विरल होने के कारण वायु तीव्र और निर्बाध वेग से बहती है तथा भूमि पृष्ठ का अपघर्षण करती है। फलत: मिट्टी के कण कटकर वायु के प्रवाह द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानान्तरित हो जाते हैं।