search
Q: ‘शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली’ यह परिभाषा किसकी है?
  • A. दण्डी की
  • B. भामह की
  • C. मम्मट की
  • D. आनन्दवर्धन की
Correct Answer: Option A - ‘शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली’’ यह परिभाषा दण्डी की है। आनन्दवर्धन के अनुसार काव्य की परिभाषा है-काव्यस्यात्मा ध्वनि:। मम्मट के अनुसार, काव्य की परिभाषा - ‘‘तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलङ्कति पुन: क्वापि।’’ भामह के अनुसार काव्य की परिभाषा- ‘‘शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् । विश्वनाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा -‘‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’’
A. ‘शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली’’ यह परिभाषा दण्डी की है। आनन्दवर्धन के अनुसार काव्य की परिभाषा है-काव्यस्यात्मा ध्वनि:। मम्मट के अनुसार, काव्य की परिभाषा - ‘‘तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलङ्कति पुन: क्वापि।’’ भामह के अनुसार काव्य की परिभाषा- ‘‘शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् । विश्वनाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा -‘‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’’

Explanations:

‘शरीरं तावदिष्टार्थ व्यवच्छिन्ना पदावली’’ यह परिभाषा दण्डी की है। आनन्दवर्धन के अनुसार काव्य की परिभाषा है-काव्यस्यात्मा ध्वनि:। मम्मट के अनुसार, काव्य की परिभाषा - ‘‘तददोषौ शब्दार्थौ सगुणावनलङ्कति पुन: क्वापि।’’ भामह के अनुसार काव्य की परिभाषा- ‘‘शब्दार्थौ सहितौ काव्यम् । विश्वनाथ के अनुसार काव्य की परिभाषा -‘‘वाक्यं रसात्मकं काव्यम्’’