Correct Answer:
Option A - ‘‘श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। बरनौ रघुवर विमल जस, जो दायक फलचार।।’’ मेें दोहा छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएं और द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएं होती हैं। ‘सोरठा’ दोहा का उल्टा होता है अर्थात् इसके प्रथम व तृतीय चरण में 11-11 तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। बरवै अवधी का छन्द जिसमें 12 व 7 मात्रा पर यति होती है। रोला 24 मात्राओं का मात्रिक छंद है।
A. ‘‘श्री गुरु चरण सरोज रज, निज मन मुकुर सुधार। बरनौ रघुवर विमल जस, जो दायक फलचार।।’’ मेें दोहा छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएं और द्वितीय तथा चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएं होती हैं। ‘सोरठा’ दोहा का उल्टा होता है अर्थात् इसके प्रथम व तृतीय चरण में 11-11 तथा द्वितीय व चतुर्थ चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। बरवै अवधी का छन्द जिसमें 12 व 7 मात्रा पर यति होती है। रोला 24 मात्राओं का मात्रिक छंद है।