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Q: ‘श्रूयताम्’ पदस्य व्युत्पत्ति: दीयताम्
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  • A. श्रु + यत् + ताम्
  • B. श्रु + यक् + ताम्
  • C. श्रु + ण्यत् + ताम्
  • D. श्रु + य + ताम्
Correct Answer: Option B - श्रूयताम् पदस्य व्युत्पत्ति: श्रु + यक् + ताम् अस्ति। अर्थात् श्रूयताम् में श्रु धातु + यक् प्रत्यय लोट्लकार प्रथम पुरूष एकवचन का प्रयोग है। ‘सार्वधातुके यक्’ भाव तथा कर्म अर्थ में धातु से यक् प्रत्यय होता है। तथा भाव अर्थ में प्रकृति से ही प्रथम पुरूष एक वचन मात्र होता है। ‘‘त्वया मया अन्यैश्च भूयते’’
B. श्रूयताम् पदस्य व्युत्पत्ति: श्रु + यक् + ताम् अस्ति। अर्थात् श्रूयताम् में श्रु धातु + यक् प्रत्यय लोट्लकार प्रथम पुरूष एकवचन का प्रयोग है। ‘सार्वधातुके यक्’ भाव तथा कर्म अर्थ में धातु से यक् प्रत्यय होता है। तथा भाव अर्थ में प्रकृति से ही प्रथम पुरूष एक वचन मात्र होता है। ‘‘त्वया मया अन्यैश्च भूयते’’

Explanations:

श्रूयताम् पदस्य व्युत्पत्ति: श्रु + यक् + ताम् अस्ति। अर्थात् श्रूयताम् में श्रु धातु + यक् प्रत्यय लोट्लकार प्रथम पुरूष एकवचन का प्रयोग है। ‘सार्वधातुके यक्’ भाव तथा कर्म अर्थ में धातु से यक् प्रत्यय होता है। तथा भाव अर्थ में प्रकृति से ही प्रथम पुरूष एक वचन मात्र होता है। ‘‘त्वया मया अन्यैश्च भूयते’’