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Q: ‘श्रूयतां’ शब्दरूपं कस्मिन् वाच्ये निर्मीयते?
  • A. कर्मवाच्ये
  • B. कर्तृवाच्ये
  • C. कर्मकर्तृवाच्ये
  • D. भाववाच्य
Correct Answer: Option A - ‘श्रूयताम् ’ शब्दरूपं कर्मच्ये निर्मीयते। अर्थात् ‘श्रूयताम’ शब्दरूप कर्मवाच्य में बनता है। सकर्मक धातुओं से लकार कर्म और कर्ता अर्थ में तथा अकर्मक धातुओं से लकार भाव और कर्ता अर्थ में होते है। भाव-कर्मणों: सूत्र से भाव और कर्म में हुए लकार के स्थान पर अत्मनेपद प्रत्यय होते है। तथाा ‘सार्वधातु के यक्’ सूत्र से भाव या कर्म के वाचक सार्वधातुक होने पर धातु से यक् प्रत्यय होता है। अत: श्रुधातु सकर्मक होने से कर्त ओर कर्म वाच्य में प्रयोग होने पर कर्म वाच्य में आत्मनेपद यक् प्रत्यय का विधान होकर लोट्लकार प्रथम पुरुष एकवचन में श्रुयताम् रूप सिद्ध हो जाता है।
A. ‘श्रूयताम् ’ शब्दरूपं कर्मच्ये निर्मीयते। अर्थात् ‘श्रूयताम’ शब्दरूप कर्मवाच्य में बनता है। सकर्मक धातुओं से लकार कर्म और कर्ता अर्थ में तथा अकर्मक धातुओं से लकार भाव और कर्ता अर्थ में होते है। भाव-कर्मणों: सूत्र से भाव और कर्म में हुए लकार के स्थान पर अत्मनेपद प्रत्यय होते है। तथाा ‘सार्वधातु के यक्’ सूत्र से भाव या कर्म के वाचक सार्वधातुक होने पर धातु से यक् प्रत्यय होता है। अत: श्रुधातु सकर्मक होने से कर्त ओर कर्म वाच्य में प्रयोग होने पर कर्म वाच्य में आत्मनेपद यक् प्रत्यय का विधान होकर लोट्लकार प्रथम पुरुष एकवचन में श्रुयताम् रूप सिद्ध हो जाता है।

Explanations:

‘श्रूयताम् ’ शब्दरूपं कर्मच्ये निर्मीयते। अर्थात् ‘श्रूयताम’ शब्दरूप कर्मवाच्य में बनता है। सकर्मक धातुओं से लकार कर्म और कर्ता अर्थ में तथा अकर्मक धातुओं से लकार भाव और कर्ता अर्थ में होते है। भाव-कर्मणों: सूत्र से भाव और कर्म में हुए लकार के स्थान पर अत्मनेपद प्रत्यय होते है। तथाा ‘सार्वधातु के यक्’ सूत्र से भाव या कर्म के वाचक सार्वधातुक होने पर धातु से यक् प्रत्यय होता है। अत: श्रुधातु सकर्मक होने से कर्त ओर कर्म वाच्य में प्रयोग होने पर कर्म वाच्य में आत्मनेपद यक् प्रत्यय का विधान होकर लोट्लकार प्रथम पुरुष एकवचन में श्रुयताम् रूप सिद्ध हो जाता है।