Explanations:
श्रुतलेख वह शिक्षण विधि है जो शिक्षार्थी को वास्तविक समस्या में शामिल करता है। श्रुतलेख का अर्थ ‘सुने हुए को लिखना’ या ‘सुनकर लिखना’ होता है जिसे ‘इमला’ भी कहते है, इससे सुनकर लिखने की कुशलता का विकास होता है। श्रुतलेख लेखन कौशल को विकसित करने का साधन है परन्तु इसकी सहायता से श्रवण कौशल को भी विकसित किया जा सकता है।