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Q: ‘‘सेवाधर्मो परमगहनो योगिनामप्यगम्य:’’ कथन है :
  • A. भवभूति का
  • B. भर्तृहरि का
  • C. कालिदास का
  • D. भारवि का
Correct Answer: Option B - प्रस्तुत सूक्ति भर्तृहरि कृत नीतिशतकम् से ली गई है। इस सूक्ति का आशय है सेवाधर्म बड़ा ही विकट है, जो योगियों के लिए भी अगम्य है।
B. प्रस्तुत सूक्ति भर्तृहरि कृत नीतिशतकम् से ली गई है। इस सूक्ति का आशय है सेवाधर्म बड़ा ही विकट है, जो योगियों के लिए भी अगम्य है।

Explanations:

प्रस्तुत सूक्ति भर्तृहरि कृत नीतिशतकम् से ली गई है। इस सूक्ति का आशय है सेवाधर्म बड़ा ही विकट है, जो योगियों के लिए भी अगम्य है।