Q: ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:’ यह वचन किस ग्रन्थ का है
A.
गीता
B.
अभिज्ञानशाकुन्तलम्
C.
नीतिशतकम्
D.
वेदानासार:
Correct Answer:
Option A - ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:’ यह गीता के तीसरे अध्याय के 35वें श्लोक से लिया गया है, जिसका अर्थ है अपने धर्म में तो मरना भी कल्याण कारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है।
A. ‘स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:’ यह गीता के तीसरे अध्याय के 35वें श्लोक से लिया गया है, जिसका अर्थ है अपने धर्म में तो मरना भी कल्याण कारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है।
Explanations:
‘स्वधर्मे निधनं श्रेय: परधर्मो भयावह:’ यह गीता के तीसरे अध्याय के 35वें श्लोक से लिया गया है, जिसका अर्थ है अपने धर्म में तो मरना भी कल्याण कारक है और दूसरे का धर्म भय को देने वाला है।
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