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Q: साधारणीकरण की सही व्याख्या है
  • A. जब कोई भी पाठक किसी साधारण काव्य या साधारण नाटक का रसास्वादन करे तब यह क्रिया साधरणीकरण कहलाती है
  • B. जब कोई पाठक किसी कृति को पढ़ते समय स्वयं का साधारण ही समझें तो यह क्रिया साधारणीकरण कहलाती है
  • C. जब कोई पाठक या श्रोता किसी असाधारण व्यक्ति की तुलना या मूल्यांकन साधारण व्यक्ति को लेकर करता है, तब उसे साधारणीकरण कहते हैं
  • D. साधारणीकरण वह व्यापार है, जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कविनिर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर साम
Correct Answer: Option D - साधारणीकरण वह व्यापार है, जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कवि निर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर सामान्य बन जाते हैं। यह साधारणीकरण की सही व्याख्या है।
D. साधारणीकरण वह व्यापार है, जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कवि निर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर सामान्य बन जाते हैं। यह साधारणीकरण की सही व्याख्या है।

Explanations:

साधारणीकरण वह व्यापार है, जिसके द्वारा काव्य सृष्टि में कवि निर्मित पात्र व्यक्ति विशेष न बनकर सामान्य बन जाते हैं। यह साधारणीकरण की सही व्याख्या है।