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Q: ‘स्थितप्रज्ञस्य’ लक्षणं गीताया: कस्मिन्नध्याये कृतमस्ति?
  • A. तृतीये
  • B. द्वितीये
  • C. चतुर्थे
  • D. पञ्चमे
Correct Answer: Option B - ‘‘स्थितप्रज्ञ’’ का लक्षण गीता के द्वितीय अध्याय (सांख्ययोग) में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि स्थितप्रज्ञ क्या है। इसको गीता के इस श्लोक के माध्यम से समझा जा सकता है–‘‘प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान्। आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते।।’’
B. ‘‘स्थितप्रज्ञ’’ का लक्षण गीता के द्वितीय अध्याय (सांख्ययोग) में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि स्थितप्रज्ञ क्या है। इसको गीता के इस श्लोक के माध्यम से समझा जा सकता है–‘‘प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान्। आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते।।’’

Explanations:

‘‘स्थितप्रज्ञ’’ का लक्षण गीता के द्वितीय अध्याय (सांख्ययोग) में बताया गया है। इसमें बताया गया है कि स्थितप्रज्ञ क्या है। इसको गीता के इस श्लोक के माध्यम से समझा जा सकता है–‘‘प्रजहाति यदा कामान्सर्वान्पार्थ मनोगतान्। आत्मन्येवात्मना तुष्ट: स्थितप्रज्ञस्तदोच्यते।।’’