Correct Answer:
Option A - ‘सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।। नमस्तस्मै कृता येन रम्या ......कथा।।’ उपरिलिखितस्य पद्यस्य रिक्त स्थानं ‘रामायणी’ भवतु। अर्थात् उपरिलिखित पद्य का रिक्त स्थान ‘रामायणी’ होगा। यह ‘रम्या रामायणी कथा’ सूक्ति परक वाक्य त्रिविक्रम भट्ट द्वारा विरचित नलचम्पू (चम्पू काव्य) से है इसमें सात उच्छ्वास हैं प्रत्येक उच्छ्वास का अन्त ‘हरचरणसरोज पद’ से होता है, यह श्लेष-प्रधान शैली का ग्रन्थ है, लक्षण- गद्यपद्यमयं काव्यं चम्पूरित्यभिधीयते (साहित्य दर्पण) इनकी एक और प्रसिद्ध ग्रन्थ मदालसा-चम्पू है। अत: विकल्प (a) सही है तथा अन्य शेष विकल्पों में (b) कादम्बरी यह बाणभट्ट की कल्पना प्रसूत (कविकल्पित) कथा है तथा भागवती, साहसिकी ग्रन्थ कोटि में नहीं हैं।
A. ‘सदूषणापि निर्दोषा सखरापि सुकोमला।। नमस्तस्मै कृता येन रम्या ......कथा।।’ उपरिलिखितस्य पद्यस्य रिक्त स्थानं ‘रामायणी’ भवतु। अर्थात् उपरिलिखित पद्य का रिक्त स्थान ‘रामायणी’ होगा। यह ‘रम्या रामायणी कथा’ सूक्ति परक वाक्य त्रिविक्रम भट्ट द्वारा विरचित नलचम्पू (चम्पू काव्य) से है इसमें सात उच्छ्वास हैं प्रत्येक उच्छ्वास का अन्त ‘हरचरणसरोज पद’ से होता है, यह श्लेष-प्रधान शैली का ग्रन्थ है, लक्षण- गद्यपद्यमयं काव्यं चम्पूरित्यभिधीयते (साहित्य दर्पण) इनकी एक और प्रसिद्ध ग्रन्थ मदालसा-चम्पू है। अत: विकल्प (a) सही है तथा अन्य शेष विकल्पों में (b) कादम्बरी यह बाणभट्ट की कल्पना प्रसूत (कविकल्पित) कथा है तथा भागवती, साहसिकी ग्रन्थ कोटि में नहीं हैं।