search
Q: ‘स्तुत्य:’ इति शब्दे प्रत्यय: अस्ति-
  • A. यत्।
  • B. ण्यत्।
  • C. क्यप
  • D. तव्यत्।
Correct Answer: Option C - ‘स्तुत्य:’ इति शब्दे ‘क्यप्’ प्रत्यय: अस्ति। कृत्य प्रत्यय सात हैं ‘तव्यत्, तव्य, अनीयर्, यत्, ण्यत्, क्यप्, और केलिमर् । ये प्रत्यय सदा भाववाच्य और कर्मवाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं कर्तृवाच्य में नहीं । ‘क्यप् कुछ ही धातुओं में लगता है। इसके पूर्व यदि धातु का अन्तिम स्वर ह्रस्व हो तो उसके उपरान्त अर्थात् धातु और प्रत्यय के बीच में त् आ जाता है जैसे- स्तु + क्यप्स्तु = + त् + य = स्तुत्य ।
C. ‘स्तुत्य:’ इति शब्दे ‘क्यप्’ प्रत्यय: अस्ति। कृत्य प्रत्यय सात हैं ‘तव्यत्, तव्य, अनीयर्, यत्, ण्यत्, क्यप्, और केलिमर् । ये प्रत्यय सदा भाववाच्य और कर्मवाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं कर्तृवाच्य में नहीं । ‘क्यप् कुछ ही धातुओं में लगता है। इसके पूर्व यदि धातु का अन्तिम स्वर ह्रस्व हो तो उसके उपरान्त अर्थात् धातु और प्रत्यय के बीच में त् आ जाता है जैसे- स्तु + क्यप्स्तु = + त् + य = स्तुत्य ।

Explanations:

‘स्तुत्य:’ इति शब्दे ‘क्यप्’ प्रत्यय: अस्ति। कृत्य प्रत्यय सात हैं ‘तव्यत्, तव्य, अनीयर्, यत्, ण्यत्, क्यप्, और केलिमर् । ये प्रत्यय सदा भाववाच्य और कर्मवाच्य में ही प्रयुक्त होते हैं कर्तृवाच्य में नहीं । ‘क्यप् कुछ ही धातुओं में लगता है। इसके पूर्व यदि धातु का अन्तिम स्वर ह्रस्व हो तो उसके उपरान्त अर्थात् धातु और प्रत्यय के बीच में त् आ जाता है जैसे- स्तु + क्यप्स्तु = + त् + य = स्तुत्य ।