Correct Answer:
Option A - स्तूप निर्माण की परंपरा बहुत पुरानी है। वैदिक काल में शव-समाधियों को मिट्टी के थूहों या टीलों के रूप में बनाया जाता था। इन्हीं शव-समाधियों को स्तूपों का आदि-प्रारूप माना जाता है। पहले इसका उद्देश्य मात्र अस्थि संचय था, बाद में इसका विकास पवित्र स्मृतिचिन्ह के रूप में हुआ। स्तूप निर्माण की परंपरा का वास्तविक इतिहास बौद्ध और जैन धर्म के साथ शुरू होता है।
A. स्तूप निर्माण की परंपरा बहुत पुरानी है। वैदिक काल में शव-समाधियों को मिट्टी के थूहों या टीलों के रूप में बनाया जाता था। इन्हीं शव-समाधियों को स्तूपों का आदि-प्रारूप माना जाता है। पहले इसका उद्देश्य मात्र अस्थि संचय था, बाद में इसका विकास पवित्र स्मृतिचिन्ह के रूप में हुआ। स्तूप निर्माण की परंपरा का वास्तविक इतिहास बौद्ध और जैन धर्म के साथ शुरू होता है।